खाली पीली
लोगों को कठोर दिख रहा हू मैं आज
कल मैंने नरम होने की कीमत चुकाई है
आज मैं उदास हूं खुश रहने के लिए
कल मुझे सूखे पत्तों सा समेट कर किसी ने आग लगायी है
कल तक मेरी खूबियाँ बताते नहीं थकते थे जो
उसी ने आज मुझमे बहुत सी कमियां बतायी है.
✒️ नीलेश सिंह
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