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almost प्यार

इंसान दो चीजों से बना है, एक दुःख और दूसरा सुख का इंतजार. प्यार सुख की उम्मीद और दुख के खतम होने के इंतजार के बीच एक पुल की तरह है.  

माँ! के नाम पत्र

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माँ!        डेढ़ दशक हो गये,जब आपने हम सबसे विदा लिया. राम जी के वनवास से भी ज्यादा.  ये कैलेंडर कहता है मगर दिल कहता है डेढ़ लम्हा भी नहीं हुआ,जैसे आज और अभी की ही बात हो.आज की यह तारीख़ मेरी ज़िंदगी के कैलेंडर से कोई डिलीट कर दे और बस यहीं पर सब कुछ रोक दे,दुर्गा पूजा का वो समय था जंहा सब लोगों अपने यहां भगवती को बुला रहे थे उस समय आप हमे छोड़ कर चले गए,दुर्गा पूजा मे सबके यहां माता आती है और मेरे पास से माँ ............... वो समय आज भी सिहरन देता है उस समय मैं इतना तो नहीं समझ पाया था की आपका न रहना मुझे कितना प्रभावित करेगा उस समय तो लोगों ने समझाया ऐसा होता है,तुम अकेले थोड़ी हो! वगैरह वैगरह. मेरे साथ भी हुआ लेकिन आज केवल इतना नहीं है.आपका जाना संसार के सारे जीव का मुख मोड़ लेना था,मुझे emotion के स्तर पर इतना कमजोर कर गया आपका जाना की आज तक किसी का बेटा मात्र बोल जाना मुझे उसके माया जाल मे डाल कर अपने आप को भुला देता है.कोई थोड़ा सा प्यार दिखा देता है तो मैं अपना सब कुछ भूल सा जाता हूँ लोग मुझे अपनी सहूलियत के हिसाब से गले लगाते है फिर उनका गला भारी हो जात...

हिन्दी दिवस

उसके माथे पर बिंदी और मेरी जुबान पर हिन्दी  आहा आहा........ 

8 अगस्त 2026

दुनिया में जितने भी लोग एक दूसरे को गले लगाते है तो उनके गले लगे रहने का औसत समय केवल 3 सेकंड होता है, जब हम किसी को 20 सेकंड से ज्यादा देर के लिए गले लगाते है तब हम पिघलना शुरू होते है.  गले लगने से दुख खतम नहीं होता पिघलने लगता है 

07 अगस्त 2026

कभी कभी हमे सांत्वना केवल दूसरों के दुख से मिलती है. हम सभी कुछ न कुछ झेल रहे हैं और यही इस दुनिया को रहने लायक बनाता है, इस दुनिया को दुःख ने ही जोड़ रखा है वर्ना उम्मीद पर दुनिया इतना लम्बा नहीं टिकती. 🖊️✒️ किताब 

कैसे भूल जाऊँ

पास किसी के जाता हू तो डरता हू कंही ज्यादा पास न चल जाऊँ, गले लगा कर गला काट लिया है किसी ने मेरा,कैसे तुम्हें गले लगाऊँ  मेरा फोन बंद रहने से अटक जाती थी सांसे उसकी भी,  और वो मरते हुए मुझे छोड़ गयी बताओ उसको मैं कैसे भूल जाऊँ     ✒️ नीलेश सिंह 

दर्द

जब ज़रूरत थी तब तक... अपनी ज़रूरत थी तब तक बात की दिल खोलकर, रात-रात भर, लगातार मेसेजों की बारिश,अच्छी अच्छी बातें, तारीफ़ें, वादे और हसीं मज़ाक़ ,फिर धीरे से प्यार की बातें शुरू हुईं।लफ़्ज़ों में शहद घुल गया, रातों को नाम मिल गया और सुबहों को इंतज़ार।लगा जैसे कोई अपना मिल गया, जो सुनता है, समझता है, थामता है।  और फिर... अचानक सब बंद…. मेसेज बंद, बातें बंद, रिप्लाई बंद और एक दिन वो इंसान जो मेरे हर नोटिफिकेशन पर आ जाता था, वो अब मेसेज देख के भी ख़ामोश हो गया,पूछो तो बिजी हूँ,दोबारा पूछो तो बाद में बात करते हैं,तीसरी बार पूछने की हिम्मत ही नहीं बचती, क्योंकि सामने से जो दीवार खड़ी हो गई है, उस पर सिर मारना सिर्फ़ अपना ही नुक़सान है। सबसे ज़्यादा तकलीफ़ “ना” सुनना नहीं लगता, सबसे ज़्यादा तकलीफ़ वो ख़ामोशी देती है जो बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह जाती है।वो ख़ामोशी जो बताती है कि तुम बस एक वक़्ती ज़रूरत थे।जब उसे तन्हाई काट रही थी, जब उसे कोई चाहिए था सुनने वाला, तब तुमसे बातें की और तुम याद आए।तुम्हारी बातों ने मरहम का काम किया, तुम्हारे वक़्त ने उसका अकेलापन भरा और जैसे ही उनकी दुनिया फि...