नाना पाटेकर

आ गए सब मेरी मौत का देखने तमाशा
खत्म हुआ सांसों का खेल,खत्म हुई आशा. 
जिंदगी थी तो एक उसूल था 
पहले लात, फिर बात और फिर मुलाकात का रूल था 
पर मौत से जब हुई अपनी बात 
बदल गए सारे हालात. 
चीख चीख कर दुनिया को ये बात बतायी थी 
ये हिन्दू मुसलमान का खून सब एक है मिला कर ये बात बतायी थी
कहा था इंसान बन कर जीओगे तो जी जाओगे
वर्ना धर्म के चक्कर में मारे जाओगे

वक़्त जब हमारा था तो गोली भी हमारी थी 
ज़ालिमों के आगे न झुकने वाली जुबान हमारी थी 
आवाज कड़क थी मगर दिल का फकीर था 
जानता सिस्टम का सच था जानता हर तस्वीर था 
वह जानता था हर सच जानता था 
सिस्टम के सामने मरेगा आदमी ही हर दर्द पहचानता था 
जो कहता था भगवान का दिया सब कुछ है उसके पास
मगर जाते ज़ाते कह गया अंतिम समय की लकड़ी है उसके लिए खास 

पर्दा गिर चुका है रंगमंच का सन्नाटा अब छाने दो 
फकीर अपने लिए लकड़ी तक जमा कर गया चैन से उसे जाने दो

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