फाल्गुन

ये शाम ढ़ल रही सुबह होने के लिए
वो खुद को खो रहा खुद मे रहने के लिए
लोग मान बैठे जिसे इश्क का महीना 
उसने अपने दिन घटा लिए फाल्गुन महीने के लिए. 



     ✒️नीलेश सिंह 

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